शुक्रवार, 27 मई 2011

आम जनता पर सरकारी सीनाजोरी...







आम जनता तो जैसे होती ही ठगने के लिए है और सरकारी सीनाज़ोरी देखिये कभी कहते हैं कि पिछले घाटे को पूरा करने के लिये दाम बढाये गये हैं, कभी अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की उथल पुथल के भारी भरकम कारण पेश कर दिए जाते हैं जो बिचारी मासूम जनता की समझ से परे होते हैं ।कभी कभार मूल्य नियंत्रण के तोहफे इस कदर प्रभावी हों जाते हैं कि सारे देश मे चुनावी बूथ इससे प्रभवित हो जाते हैं |अक्सर चिल्लाने वाली ममता भी खामोश रह जाती हैं ,क्योंकि इस मूल्य नियंत्रण का लाभ शायद उन्हे भी मिला ही है । खैर .... आखिरकार आम जनता ठगी जा चुकी है और आगे भी ठगी जाती रहेगी | सरकार जिसकी रहेगी वो ये सीनाजोरी का हथियार बडी ही सीनाजोरी से इस्तेमाल करता रहेगा और जिसे फ़ायदा होना होगा वो मज़े मे रहेगा जिसका नुकसान होगा वो चिल्लायेगा और मरेगी सिर्फ़ आम जनता। क्योंकी खास जनता को, सरकारी अफ़सरों को और ठगी से बन रहे नेताओं को इससे कोई फ़र्क़ नही पड़ने वाला क्योंकी दाम बढे या ना बढे उनके बाप का क्या जाता है सरकारी माल से खरीदा जाता है सब कुछ,मेहनत की कमाई तो जाती है आम आदमी की,जिसकी चिंता करने का सरकार के पास टाईम ही नही है।उन्हे तो बस जनता को ठगने की तिकडम करना आता है और ऐसा वो बड़ी ही सीनाजोरी से कर रहे हैं।
दरअसल हाल ही में एक खबर पढ़ी कि देश में डीजल कार की मांग बढ़ रही है | कारण क्या है ? निसंदेह पेट्रोल की बढ़ती क़ीमतों ने डीज़ल कारों की मांग बढ़ा दी है। डीज़ल कारों की क़ीमत ज़्यादा होने के बावजूद डीज़ल कार अब लोगों के लिए फ़ायदे का सौदा बनती जा रही है। पिछले 5 सालों में डीज़ल कारों की बिक्री में 10 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है। पांच साल पहले भारतीय कार बाज़ार में से डीज़ल कारों की बिक्री का 20-22 फ़ीसदी हिस्सा था, जो अब बढ़कर 32 फ़ीसदी पर पहुंच गया है। वाह ! क्या तरक्की की है डीजल कार ने |


              पेट्रोल के दाम बढा़ने के बाद सरकार अब संभवतः डीजल, रसोई गैस और मिट्टी तेल के दाम में भी संशोधन का फैसला कर सकती है। इस बारे में निर्णय लेने के लिये वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक होनी भी तय है । कहा जा रहा है कि डीजल, एलपीजी रसोई गैस और राशन की दुकानों से बिकने वाले मिट्टी के तेल के दाम बढ़ने तय हैं। मंत्री समूह को केवल यह तय करना है कि इसमें कितनी वृद्धि की जाए। अभी पेट्रोल कि बढ़ी कीमतों ने डीजल कार की मांग में इजाफा कर दिया पर आगे भविष्य क्या??? जनता सरकार को समस्याओं से निजात पाने के लिए चुनती है न कि समस्याओं में इजाफे के लिए | मौजूदा सरकार में हर प्रकार के बेईमान बैठे है साथ ही महंगाई , चोरी , लूट , घोटाला , रिश्वतखोरी , अफसर शाही ,जैसे सारे गैर क़ानूनी कार्य हो रहे है ! आखिर बात क्या है ? देश की जनता जिस महंगाई की मार से त्राहि-त्राहि कर रही है, उस पर सरकार इतनी लाचार, निष्क्रिय और दिशाहीन क्यों दिखाई दे रही है? जबकि यह महंगाई कोई नयी तात्कालिक मुसीबत नहीं है। पिछले दो-तीन सालों से इसकी मार पड़ रही है। इन तमाम सवालो का दूर दूर तक कोई जवाब नहीं दिखाई पड़ता |


          आम जनता कि हाथ में अगर चुनाव के दौरान वोट जैसा कीमती हथियार है तो और बहुत से उपाय भी हैं जिनसे वो सरकार की सीनाजोरी और ठगी से बच सकती है | यदि तेल के दाम घटना हमारे हाथ में नहीं तो क्या??? इस अपनी कुछ आदतों को सुधारकर तेल के उपयोग को कम कर सकते है और जितना हो उसकी बचत कर सकते है | इसके लिए पब्लिक ट्रांसपोरटेशन का उपयोग करना चाहिए और अपने वाहनों का रखरखाव भी अच्छे से करना चाहिए एवम सिग्नल पे वाहनों को बन्द करना देना चाहिए साथ ही 'कार पूल'को अपना कर समस्या की गंभीरता से बचा भी जा सकता है , क्योंकि तेल कंपनिया और सरकार आये दिन इसी तरह से कीमते बढाती रहेगी और मुनाफे में कमी को घाटा बताकर हमारी जेबे ढीली करती रहेगी अब यह हम पर निर्भर है की हम इसमें से कैसे बचे और हो सके उतना तेल बचाए |




डॉ. वन्दना सिंह .